स्वास्थ्य और सौंदर्य: स्त्री से जुडी स्वास्थ्य और सौंदर्य के कुछ महत्त्वपूर्ण टिप्स

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आज हम जानेगे की स्त्री को स्वास्थ्य और सौन्दर्य कैसे बनना चाहिए। स्वास्थ्य और सौन्दर्य प्रत्येक स्त्री को अपने स्वास्थ्य और सौंदर्य की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। साफ-सुथरी, हंसती और अपने चारो ओर आनन्द की छटा बिखेरती स्त्री भला किसके मन को नहीं लुभा सकती। स्वास्थ्य और सौंदर्य एक-दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते, क्योंकि स्वास्थ्य के बिना सौंन्दर्य सर्वथा नकली प्रतीत होता है। इसलिए कहा गया है कि उत्तम स्वास्थ्य में ही वास्तविक सौंदर्य है। चूंकि देखने वालों की नजरें सबसे पहले चेहरे पर ही पड़ती हैं  अत: चेहरे को ही आकर्षक बनाने का कार्य प्रत्येक स्त्री करती है 1 रुज, लिपिस्टिक, तेल, इत्र, पाउडर और क्रीम आदि चेहरे की आभा बढ़ाने के लिए ही प्रयुक्त किए जाते हैं। यदि इन कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधनों के बजाए गालों से कुदरती तौर पर रक्त की लालिमा फूटे, होठों पर स्वास्थ्य की ताजा मुस्कराहटों की कलियां खिले और आंखों में नमी व चमक हो, तो प्रभाव नि: संदेह बड़ा ही दिलकश होगा। दूसरी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि स्वास्थ्य और सौंदर्य संपूर्ण शरीर से झांकता प्रतीत होना चाहिए।

बहुत-सी स्त्रियां अपने घर के कामकाज में इस बुरी तरह से जुटी रहती हैं कि अपने शरीर की स्वास्थ्य और सौंदर्य की कोई खास ध्यान ही नहीं देती हैं, जिस कारण उनकी आंखों के नीचे समय से पहले ही झुरियाँ पड़ जाती हैं। इसका मतलब साफ है कि वो आंखों पर आवश्यकता से अधिक जोर देती रही हैं, रात में देर तक जागती रही हैं। ऐसी स्त्रियों को दिन में बीस-पच्चीस मिनट तक आँखों को बंद करके उन्हें आराम देना चाहिए। यदि चेहरे की त्वचा खुरदरी और रुखी हो गई हो तो वह अपने भोजन के प्रति ध्यान दें। भोजन में दूध या लस्सी की मात्रा को बढ़ा दे। पानी खूब पिएं और आंखों को स्वच्छ रखें।

बहुत-सी स्त्रियां बहुत दुबली-पतली होती हैं और बहुत-सी आवश्यकताओं अधिक मोटी। अतः दुबली-पतली स्त्रियों शरीर पर थोड़ा सा मांस चढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। शरीर का स्वास्थ्य ऐसा होना चाहिए कि मुंह चढ़कर बोले और देखने वालों की निगाहों में चुभ जाए। इस प्रकार की स्त्रियों को अपनी दिनचर्या में थोड़ा-सा परिवर्तन अवश्य करना चाहिए। उत्तम स्वास्थ्य को बनाए रखने की दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

जो स्त्रियां श्रम अधिक करती हैं, उनके लिए सबसे अच्छा उपाय प्रातः भ्रमण ( सुबह की सैर ) है। योगासनों की क्रियाएं तो बहुत अधिक लाभप्रद सिद्ध होती हैं। किन्तु घरेलू ओर बाल-बच्चों वाली स्त्रियों के लिए प्राय: यह क्रियाएं करना असंभव है। इसलिए सैर करना ही उनके लिए सबसे उपयुक्त साधन है। सैर के बारे में यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि सैर सदा खुले मैदान, खेत, जंगल या पार्क में की जानी चाहिए ताकि श्रमके साथ-साथ फेफड़ों में शुद्ध वायु भी पहुंचती रहे। फलतः स्वास्थ्य लाभ होता रहे। सैर के समय तेज कदमों से चलना चाहिए तथा इतनी थकावट का अनुभव तो अवश्य होना चाहिए जिससे की थोड़ा पसीना भी आ जाए। जैसे-जैसे समय बीतता जाए दूरी भी बढ़ाते रहें।

यदि स्त्रियां प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठना प्रारंभ कर देंगी, तो सारा दिन उनके शरीर में स्फूर्ति बनी रहेगी। प्रत्येक स्त्री को इन बातों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। स्नान से पूर्व शरीर पर तेल की मालिश अवश्य करें। इससे शरीर पुष्ट तथा दृढ़ होता है। वायु की व्याधिया नष्ट हो जाती हैं और आंखों की ज्योति बढ़ती है। व्यायाम करने से अथवा सुबह की सैर से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं तथा आहार पाचन भी ठीक प्रकार से होता है। शरीर स्वस्थ तथा जवान बना रहता है और आलस्य पास नहीं फटकता है।

सप्ताह में कम से कम एक बार शरीर पर उबटन अवश्य लगानी चाहिए। उबटन लगाकर मालिश करना भी आवश्यक होता है। इससे शरीर की त्वचा चिकनी बनी रहती है और पसीने की दुर्गन्ध से भी छुटकारा मिल जाता है। शरीर की अनावश्यक चर्बी बढ़ने की अवस्था में उबटन से लाभ होता है। उबटन मांसपेशियों की सुदृढ़ता एवं स्फूर्ति के लिए चमत्कारिक लाभ देती है। स्नान भी सदा ठंडे पानी से करना चाहिए। इससे शरीर का पसीना व मैल नष्ट होते हैं।

ठंडा पानी शरीर की ऊष्मा को कम करके नई स्फूर्ति लाता है तथा जठराग्नि को प्रदीप्त करके हृदय के लिए हितकर सिद्ध होता है। भोजन भी अपनी प्रकृति के अनुसार उचित मात्रा में और ठीक समय पर करना चाहिए। निद्रा भी हमेशा नियम तथा अवस्था के अनुसार लेनी चाहिए। ठीक मात्रा में नींद लेने से शरीर स्वस्थ रहता है। भोजन की पाचन-क्रिया पर भी निद्रा का भरपूर प्रभाव पड़ता है। आलस्य नष्ट हो जाता है और मन प्रसन्न रहता है। निद्रा लेना इस कारण से भी आवश्यक है कि जब आंख, कान आदि ज्ञानेन्द्रियां और हाथ-पैर आदि कर्मेन्द्रियां तथा मन कार्य करते-करते थक जाते हैं तब इन्द्रियों पर नियंत्रण रखनेवाली आत्मा को अपने मस्तिष्क से उठकर हृदय में आकर विश्राम करती हैं। अच्छी और स्वाभाविक निद्रा वो ही है, जिसे लेने के बाद शरीर की सारी थकान दूर हो जाए।

जो स्त्रियां स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए नियत समय पर सोती और सोकर उठती हैं, वो ठीक प्रकार से नींद या निद्रा ले लेने के कारण अपनी शारीरिक शक्ति में वृद्धि कर लेती है। उनका तन और मन दिन भर प्रफुल्लित रहता है। उनमें सुस्ती नहीं रहती। भोजन को पचाने वाली पेट की अग्नि प्रदीप्त होती है। शरीर में ध तुओं का निर्माण भी ठीक प्रकार से होता है। अनेक प्रकार के रोगों से बचाव हो जाता है।

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