Hair: चेहरे के अनचाहे बालों की संबंधित समस्याए एवं सुझाव

anchahe balon ki samasya

इस बात का ध्यान रखें कि प्रसाधनों के इन शेड़ों का अब प्रयोग करें, जिन्हें आप छोटी उम्र में करती आई हैं। अपनी उम्र के अनुसार प्रसाधन के रंग तथा केश सज्जा भी चुनें। हल्के रंग का तरल फाउण्डेशन तथा मृदु क्रीम रूप में या तरल ब्लशर लगायें दोनों स्पंज की सहायता से लगायें, तो बढ़िया लगेगा। यदि पाउण्डर लगाये तो अतिरिक्त पाउडर को अवश्य हटा दें। विशेषकर आँखों के नीचे से, क्योंकि यहाँ और चेहरे की लकीरों में जमा होकर यह उम्र को कुछ और बढ़ा देगा।

चेहरे के हल्के दाग-धब्बों विशेषकर आँखों के नीचे वाले काले घेरों को कंसीलर से फाण्डेशन लगायें। पपोटों पर फ्रॉस्टेड या चमकदार आइशेड़ो न लगायें इससे पपोटों की सिलवटें और साफ उभर आयेंगी। लगाना ही है तो हल्के आइशेडो जैसे सलेटी या हल्का भूरा ही लगायें। उम्र के साथ आँखें सिकुड़कर कुछ छोटी-सी नजर आती हैं। इन्हें खोलने या बड़ा दर्शाने के लिए पपोटों के बीचोबीच तथा भौंहें की हड्डी पर हाइलाटर भी लगाया जाता है। काजल या लाइनर की हल्की रेखाओं से भी आँख की आकृति संवारिये।

काजल या लाइनर निचली पलकों के समानान्तर गहरा कभी न लगाये ऊपर लगायें तो भी उसे हल्के से स्पंज कर दें। ( त्वचा में मिला दें ) इससे कोमल प्रभाव पैदा होगा मस्कारा वाटरप्रुफ ही लें। बहुत गहरा मस्कारा लगाकर प्रतिदिन एक हल्का कोट ही लगायें। इस उम्र में लिपस्टिक लिप ब्रुश से ही लगायें आउटलाइन ब्रुश से बनाकर भी ब्रश से भरे। अब टिश्यू से होठों को दबाकर एक हाथ पाउडर को फेरे और उसके ऊपर अन्तिम बार लिपस्टिक लगाय ऐसा करने से लिपस्टिक अधिक देर टिकेगी तथा होठों की धारियों में जमेगा नहीं।

अनचाहे बालों की समस्या : सुन्दरता की चाहत किस महिला को नहीं होती। इसके लिए वह तरह-तरह का शृंगार करती है लेकिन चेहरे पर शरीर के बाहरी अंगों पर बाल हों तो उस महिला का सारा शृंगार धरा रह जाता है। सिर के बाल यदि चेहरे का सौन्दर्य है तो शरीर के बाहरी व भीतरी अंगों में उगे हुए अवांछित बाल सौन्दर्य में बाधक हैं। अतः आवश्यक है कि इनसे मुक्ति पा ली जाये, फिर देखिये कैसे प्रत्येक अंग निखर-निखर जायेगा।

ये अनचाहे बाल चेहरे पर ठोड़ी माथे पर तथा होठों के ऊपर होते हैं इसके अतिरिक्त शरीर के अन्य भागों पर जो कपड़ों के नीचे छिपे रहते हैं। अवांछित बालों से छुटकारा पाने के लिए अनेक विधियाँ है जो निम्नलिखित है।

1. इलैक्ट्रालाइसिस की विधि ( स्थायी उपचार ) : विश्व इलैक्ट्रोलाइसिस विधि द्वारा बालों को स्थायी रूप से हटाने की क्रिया को आरम्भ सन् 1857 में डॉ. चार्ल्स माइकेल ने किया और सन् 1916 में सौन्दर्य-वृद्धि के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपकरण बन गया।इस विधि में प्रत्येक बाल की जड़ ( फालिसिल या गड्ढे ) में एक सुईं धँसाई जाती सुङई बिल्कुल सही कोण और सही गहराई तक धँसाई जाती है ताकि यह बालों की जड़ों तक पहुँच सके। फिर उसमें विद्युत करेंट है प्रवाहित किया जाता है। ध्यान रखना पड़ता कि यह करंट सही शक्ति और सही समय तक अधिक शक्ति का करेंट प्रवाहित करने पर नुकसान भी हो सकता है।

इसमें सीधा करेंट भी प्रवाहित किया जाता है। जब सुई धँसाई जाती है तो बैटरी का यह करेंट प्रवाहित किया जाता है । तभी जड़ में एक रासायनिक प्रतिक्रिया होती है। बाल उस गड्ढे ( फलिसिल ) से निकल जाता है । उस जगह पर जड़ इतनी कमजोर हो जाती है कि दोबारा बाल नहीं उगते। इस विधि में एक-एक बाल की जड़ में सुई धँसानी पड़ती हैं जिससे समय बहुत ज्यादा लगता है। इसीलिए आजकल इस विधि का प्रचलन होता जा रहा है, और इसकी जगह ले रहा है थर्मोलाइसिस। इस नई में अपेक्षाकृत कम समय लगता है।

2. थर्मोलाइसिस : ' थर्म ' का अर्थ है ' उष्मा '। इस विधि में बाला जड़ों ( पैप्पिला ) को उष्मा के द्वारा नष्ट किया जाता है। दोनों विधियों में क यही फर्क होता है कि जहाँ इलैक्ट्रोइसिस में रासायनिक कारणों से वालों की जड़े नष्ट होती है वही थर्मोलाइसिस में उष्मा के द्वारा उन्हें नष्ट किया जाक है। उष्मा के कारण जड़ों में दोबारा बाल उगाने की शक्ति समाप्त हो अती है। इन दोनों विधियों के अतिरिक्त एक तीसरी विधि है ब्लेड। दरअसल यह विधि दोनों विधियों का मिश्रण हैं।

क्या यह स्थायी समाधान है?

इलैक्ट्रोलाइसिस या थर्मोलाइसिस के लिए आने वाली महिलायें बाल हटाने की अनेक-अनेक पुरानी विधियाँ जैसे थ्रेडिंग, वैक्सिंग आदि अपन चुकी होती हैं। इससे बालों की जड़े और मजबूत हो जाती हैं। इसलिए इलैक्ट्रोलाइसिस विधि से बालों की जड़े पूर्णरूपेण नष्ट नहीं होतीं। परन्तु दो-तीन बार इस विधि की अपनाने से जड़े नष्ट हो जाती हैं।

कितने अन्तर पर इलाज करायें?

यदि बाल बहुत घने है और उनमें वृद्धि तेजी होती है तो इस इलाज को कई बार कराना पड़ सकता है। आरम्भ में सप्ताह में एक बार इलाज कराने की आवश्यकता पड़ती है। बाद में महीने में दो बार कराना पड़ता है। पूरी तरह से मुक्ति पाने के लिए डेढ़ से दो साल तक यदि इलाज कराया जाये तो बाल पूरी तरह से गायब हो जाते हैं।

क्या दाग पड़ जाते हैं?

यदि सूई सही कोण सही गहराई तक धँसाई जाये तो कहीं कोई दाग नहीं पड़ता। हाँ, यदि इलाज किसी अनाड़ी से कराया जाये तो अवश्य दाम रह जायेंगे। परन्तु यदि यह इलाज किसी विशेषज्ञ से कराया जाये तो ऐसी कोई शिकायत नहीं आती।

कोई दुष्प्रभाव?

उसको कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। आरम्भ में कुछ निशान अवश्य पड़ जातें हैं परन्तु वे भी तीन-चार दिनों में गायब हो जाते हैं।आमतौर पर सम्पूर्ण चेहरा, सीना, पेट पर उगे बालों का इलाज किया जाता। परन्तु इस विधि द्वारा शरीर के किसी भी भाग का इलाज किया जा सकता है। पुरुष की कंधों, हथेलियों के पिछले हिस्सों पर उग आए अनचाहे बालों को हटाने के लिए इस विधि को अपना सकते हैं।

3. प्लकिंग-थ्रेडिंग-( अस्थाई उपचार ) : यदि चेहरे पर इक्का-दुक्का बाल हो जो ट्वीजर द्वारा खींच देना चाहिए। ट्वीजर द्वारा बाल खींचने की क्रिया को प्लकिंग कहते है। परन्तु अधिक बाल होने पर ट्वीजर का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे बालों की जड़ें मोटी हो जाती है। ट्वीजर द्वारा बाल खींचने से पूर्व त्वचा पर कोल्ड क्रीम की थोड़ी मालिश करने से बालों इसको जड़े मुलायम हो जाती है।

धागे द्वारा बाल उखाड़ने की क्रिया को थ्रेडिंग कहते हैं। प्लकिंग की अपेक्षा थ्रेडिंग विधि ज्यादा अच्छी है। बालों को साफ करने के लिए रेजर का भूलकर भी प्रयोग नहीं करना चाहिए। अन्यथा बालों की जड़ें मोटी जायेंगी तथा बालों की वृद्धि तेजी से होगी।

4. वैक्सिंग : अनचाहे बालों को हटाने के लिए वैक्सिंग एक सर्वाधिक उपयुक्त विधि है। परन्तु इस विधि द्वारा बाहों व टाँगों के बाल साफ करना ही उचित रहता है। इसका प्रयोग चेहरे पर कदापि नहीं करना चाहिए अन्यथा झुर्रियों पड़ने का डर रहता है।

वैक्स प्राय दो प्रकार की होती है।

( क ) गर्म वैक्सृृ
( ख ) ठंडी वैक्स

गर्म वैक्स को प्रयोग करते समय गर्म करना पड़ता है। ट्यूब में भरी ठण्डी वैक्स बिना गर्म किये प्रयोग की जा सकती है। दोनों तरह की वैक्स बाजार में उपलब्ध है।

1. तीन कप चीनी, एक भाग नींबू का रस, एक भाग सरसों का तेल, दो भाग पानी मिलाकर हल्की आँच पर पकाये। इसे लगभग आधे से पौन घण्टे तक पकायें जब घोल भूरे रंग का होने लगे तो इसे आँच से उतार ले उसमें थोड़ी ग्लिसरीन मिलाकर ठण्डा होने के लिए रख दें। फिर किसी डिब्बे में भरकर रख लें।

2. पाँच चम्मच शहद में एक चम्मच नींबू का रस धीमी आँच पर लगभग 30 मिनट पकायें। फिर आँच से उतार कर थोड़ी-सी ग्लिसरीन मिलाकर ठण्डा होने के लिए रख दें।

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