Hair Fall: बालों का छडना कैसे रोकें घरेलू उपाय

hair fall

बाल झड़ना : यह बालों की एक गम्भीर एवं चिन्ताजनक समस्या है। बालों की आयु दो से छः वर्ष तक होती है और यह लगभग आधा इंच प्रतिमाह की दर से बढ़ते हैं। अपनी आयु पूर्ण होने पर बाल स्वयं गिर जाते हैं और उस स्थान पर नये बाल पैदा हो जाते हैं। दस-बीस बाल झड़ जायें तो चिन्ता की कोई बात नहीं क्योंकि यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है परन्तु बाल गुच्छे रूप में निकले तथा हल्के होने तो यह चिन्ताजनक परिस्थिति है।

बाल झड़ने की तीन अवस्थायें होती है :

( क ) साधारण रूप से झड़ना

( ख ) अस्थायी गंजापन

( ग ) स्थायी गंजापन

( क ) साधारण रूप से बाल झड़ना : इस प्रकार बाल झड़ने के मुख्य कारण हैं-

1. गर्भावस्था के दौरान
2. प्रसव के बाद
3. शिशु को स्तनपान कराने के कारण
4. बीमारी के कारण ( टाइफाइड, फ्लू, मलेरिया आदि )
5. गले, आँख, दाँत में संक्रमण के कारण
6. औषधियों की प्रतिक्रिया स्वरूप
7. प्रदूषित वातावरण
8. मासिक धर्म बन्द होने के बाद
9. घटिया साबुन, शैम्पू, तेल आदि के प्रयोग से भी बाल झड़ते हैं।

यदि स्थिति सामान्य है तो ये स्वयं ही झड़ने बंद हो जाते हैं। सर्वप्रथम बाल झड़ने का कारण जानना आवश्यक है। कारण निश्चित होने पर उचित उपचार करने से बाल झड़ने बन्द हो जाते हैं। स्थिति गम्भीर होने पर किसी सौन्दर्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। बाल धोने के लिए अधिक गर्म पानी का प्रयोग न करें। हमेशा शैम्पू से बाल धोयें अथवा रीठा, आँवला शिकाकाई का प्रयोग करें।

( ख ) अस्थायी गंजापन : इस समस्या में सिर पर जगह-जगह बाल झड़कर गंजापन हो जाता है। इसे ऐलोपेसिया के रोग से जाना जाता है। यह समस्या लगातार मानसिक तनाव, स्यानविक गड़बड़ी, शरीर में पौष्टिक तत्वों का अभाव, मानसिक आघात आदि के कारण हो जाती है।

उपचार : मानसिक तनाव अस्थायी गंजेपन का प्रमुख कारण है। अतः सर्वप्रथम ऐसा वातावरण उत्पन्न करना चाहिए जिससे मानसिक तनाव की स्थिति पैदा न हो। अपना मन किसी रचनात्मक कार्य में लगायें। नाड़ी संस्थान को ठीक रखने के लिए किसी कुशल चिकित्सक से परामर्श लें। सिर की त्वचा में रक्त संचार की गति को तेज करने के लिए टिंचर आयोडिन से मालिश करनी चाहिए। गंजेपन से प्रभावित त्वचा पर कार्बनिक

स्नो ( शुष्क बर्फ ) लगाने से भी रक्त संचार बढ़ता है। उचित उपचार होने पर एक से छह महीने के बीच में अस्थायी गंजापन ठीक हो सकता है।

( ग ) स्थायी गंजापन : मानसिक तनाव, वंशानुगत शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी अत्यधिक मानसिक कार्य, गर्म वातावरण का प्रभाव, बालों की ठीक प्रकार से देखभाल न होने के कारण स्थायी गंजेपन की शिकायत हो जाती हैं।इसमें बाल बहुत तेजी से झड़ने लगते हैं।

स्थायी गंजेपन की स्थिति में बालों की जड़ों कमजोर हो जाती हैं। जिससे बाल जड़ से टूटने लगते हैं और कोषों को नये बाल उत्पन्न करने की क्षमता समाप्त हो जाती है। स्थायी गंजेपन के उपचार के लिए किसी अनुभवी एवं कुशल चिकित्सक से सेवायें लेनी चाहिए।

3. जूँ-लीक का समस्या : केश उत्तम स्वास्थ्य एवं सौन्दर्य के प्रतीक हैं। यदि केशों को साफ करने में आलस किया जाये तो गन्दगी से सिर में जूँ-लीक की समस्या पैदा हो जाती है। जुएँ मनुष्य की त्वचा में छेद करके शरीर का रक्त चूसती रहती हैं। जुएँ नौ दिनों की अवधि में अण्डे से निकल 15 दिनों में प्रौढ़ हो जाती। इनके होने से सिर में खुलती होती है और बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं। यह बालों की ऐसी शत्रु है जो बालों को निर्जीव बनाती है। अतः इनसे बचने के लिए निम्न उपायों पर ध्यान दें।

1. किसी ऐसे व्यक्ति का तौलिया, साबुन अथवा कंघा प्रयोग करने से बचना चाहिए जो जुओं की समस्या से ग्रस्त हो।

2. बालों को साफ रखें, क्योंकि गन्दगी के कारण जुएँ होती हैं। नारियल के तेल में कपूर पीसकर मिला लें, इसे सिर में लगायें, इसके पश्चात् रीठे अथवा शैम्पू से धो डालें।

3.पानी के साथ डिटॉल की कुछ बूंदे डालकर बाल धोयें

4. टैल्कम-पाउडर में 0.2 प्रति प्रेथरम डस्ट मिलाकर अथवा 10 प्रतिशत डी.टी.टी. मिलाकर प्रयोग में लाइये। रात को सोने से पूर्व एक चम्म पाउडर सिर में अच्छी प्रकार छिड़कें और तेजी से रगड़-रगड़कर मलें जिससे वहाँ बालों में भली प्रकार मिल जाये। पाउडर आँख, नाक, कान या मुँह में प्रवेश नहीं करना चाहिए। इसके लिये इन अंगों को ठीक प्रकार से ढक लीजिए। प्रयोग के पश्चात् हाथ साबुन से अच्छी तरह धो लें।

अथवा

नारियल के तेल में 0.2 % लिन्डैन ( बी.एच.सी. ) अथवा 0.1 % प्रेथरम के सत का घोल बनाकर जूँ मारने का तेल बनाया जा सकता है।

विशेष : उपरोक्त पाउडर या तेल रात्रि में सोने से पूर्व सिर पर मलकर बालों पर कपड़ा बाँध लीजिए कम-से-कम 24 घण्टे तक सिर न धोयें। 7-8 दिन तक इस क्रिया को दुहराते रहें, इससे जुएँ तथा लीक मर जायेंगी।

5. नींबू के रस में अदरक का रस मिलाकर सिर में लगाने से जुएँ समाप्त हो जाती हैं।

6. प्याज के रस में दही मिलाकर सिर में मलें, जुएँ मर जायेंगी।

7. बारीक दाँतों वाली कँघी से बालों की सफाई करें-नल की धार के नीचे बैठकर कंघी करने से काफी हद तक जुएँ, लीके साफ हो जाती हैं।

4. दो-मुँह बालों की समस्या : नारी सौन्दर्य को द्विगुणित करने वाले बालों के प्रति यदि थोड़ी-सी भी लापरवाही बरती जाये तो अक्सर दो मुँही बालों की समस्या पैदा हो जाती है।

दो-मुँही बाल देखते-देखते बेजान एवं कमजोर होने लगते हैं उनका बढ़ना बन्द हो जाता है। सही उपचार न करने पर यह समस्या दिनोदिन बढ़ती जाती हैं। कई बार दो की अपेक्षा तीन-चार मुँह वाले बाल हो जाते हैं।

दो-मुँही बालों की पहचान के लिए सर्वप्रथम बालों के अन्तिम छोर देखें जाते हैं। जो के अक्षर Y ( वाई ) के समान प्रतीत होते हैं।

कारण : दो मुँही बालों के अनेक कारण होते हैं। प्रमुख कारण सिर की त्वचा से निकलने वाला प्राकृतिक हेयर टॉनिक सीबम है जो कई बार बालों के अन्तिम छोर तक नहीं पहुंच पाता। इसके अन्य कारण जैसे लम्बी बीमारी का होना घटिया लोशन अथवा शैम्पू का प्रयोग, डाई व पर्मिंग स्प्रेशन का प्रयोग, तेज ड्रायर का अधिक प्रयोग, कसकर रबड़ बैंड बाँधना, गीले बालों को जोर से तौलिये से झाड़ना एवं गीले बालों में कंघी करना आदि है।

बाल दो मुँहे न हो इसके लिए निम्न सावधानियाँ बरतें :

1. बाल सूख जाने पर ही कंघी करें।

2. कलिंग यंग व ड्रायर का प्रयोग विशेष अवसरों पर ही किया जाये।

3. बाल धोते समय बालों की जड़ों की ही उँगलियों के पोरों से हल्की मॉलिश करनी चाहिए न कि बालों को कपड़े की भाँति मलकर साफ करें।

4. बाल धोने के पश्चात् हल्के हाथों से ही पौंछे।

5. रबड़ बैंड का प्रयोग न करें। रबड़ बैंड को कभी भी खींचकर न उतारें। उपरोक्त सावधानियाँ बरतने पर भी यदि किसी कारण वश बाल दो मुँही हो जाये तो इसके उपचार के दो तरीके हैं :

1. ट्रीमिंग : ट्रीमिंग के अन्तर्गत दो मुँह वाले बालों को केंची से काट देते हैं। पन्द्रह-पन्द्रह दिन के अन्तर पर इस प्रकार के बालों को काटा जाता है।

2. सिजिंग : इस विधि में बालों की एक लट को रस्सी की तरह बटते हैं। इससे दो मुंहे बाल बाहर निकल आते हैं। फिर इन्हें मोमबत्ती की लो से सावधानीपूर्वक जलाकर नष्ट कर देते हैं। इस विधि में अनुभव व सावधानी की बड़ी जरूरत है नहीं तो बालों के जलने का खतरा बना रहत है।

उपरोक्त दोनों विधियों में सरल व उचित विधि ट्रीमिंग ही है। इन दो से उपचार करने के बाद बालों की कंडीशनिंग भी जरूरी है। जिस प्रकार बालों में हो जाने पर एक बार में वे समाप्त नहीं होती। उसी प्रकार दो बाल एक बार के उपचार से समाप्त नहीं होते हैं। पन्द्रह-पन्द्रह दिन उपचार दोहराना चाहिए।

सफेद बालों की समस्यायें : कम आयु में बालों का सफेद होना भी एक समस्या है। इससे चेहरा बहुत भद्दा लगने लगता है। सदमा , बीमारी या वंशानुगत से बाल असमय सफेद होने लगते हैं। विटामिन ए और बी की कमी होने पर भी बाल सफेद होने लगते हैं।

बचाव :

1. अरण्ड का तेल में पिसे हुए काफी के बीज और चन्दन का बुरादा समान मात्रा में मिलाकर गर्म करें। ठंडा होने पर कपड़ें में छानकर बोतल में भर लें। प्रतिदिन रात को इस तेल की मालिश करें और प्रातः काल सिर धो लें। ऐसा करने से बाल सफेद होने से रुक जायेंगे और सफेद बाल काले हो जायेंगे।

2. एक चम्मच मेंहदी पाउडर, एक चम्मच आंवले का चूर्ण और एक चम्मच चाय की पत्ती लेकर एक कप गरम पानी में भिगो दे। इसमें एक चौथाई चम्मच नमक, आधा चम्मच गुलाब जल डाल दें। इसके बाद एक नींबू का रस मिला दें। इस मिश्रण को आधा घंटा बाद बालों की जड़ों में धीरे-धीरे लगायें। दो घंटे बाद बालों को पानी से धोयें। इस विधि को प्रति सप्ताह करते रहने से बाल सफेद होने से रूक जायेंगे।

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