Beauty Tips: सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री का सही उपयोग कैसे करें

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त्वचा के सौन्दर्य को बरकरार रखने के लिए क्रीम एक महत्त्वपूर्ण सौन्दर्य प्रसाधन है। इससे त्वचा पर एक तैलीय परत चढ़ जाती है जो त्वचा के कोषों को ढके रहती हैं और त्वचा शुष्क होने के बचती है। अपनी त्वचा के अनुरूप क्रीम का चुनाव करें। अच्छी किस्म की क्रीम खरीदें चूँकि घटिया किस्म के प्रसाधन त्वचा के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं। क्रीम सदैव नीचे से ऊपर की ओर लगाये। इससे त्वचा में कसाव आता है और त्वचा में लोच बना रहता है।

त्वचा के प्राकृतिक स्वरूप को पाने में एक अच्छी क्लीजिंग क्रीम अक्सर मददगार साबित होती है। प्रत्येक दिन स्नान के पश्चात् क्लीजिंग क्रीम अथवा लोशन से चेहरे की त्वचा को साफ करना चाहिए। इससे रोमछिद्रों में छिपा मैल, धूल-कण और त्वचा के अन्य दाग धब्बे आदि साफ हो जाते हैं। क्रीम चेहरे के साथ-साथ गर्दन तथा शरीर के अन्य खुले अंगों पर भी लगानी चाहिए। ग्रीष्म ऋतु में तेज धूप और लू से बचाव के लिए त्वचा पर संसक्रीम अथवा लोशन का उपयोग करना उचित है। रात को सोने से पूर्व इसे साफ कर देना चाहिए।

रूज  का उपयोग

चेहरे की त्वचा पे फाउण्डेशन क्रीम द्वारा आधार बनाने के पश्चात् रूज का प्रयोग किया जाता है। रूज गालों को चमक देकर चेहरे को स्वस्थ और कान्ति की छाया से भर देता है। इससे गालों की त्वचा का रंग नैसर्गिक व आकर्षक लगने लगता है। रूज ऐसा लगायें जो देखने में स्वाभाविक लगे। दिन में हल्का तथा रात मेहरारूज लगाना उचित रहता है।

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रूज प्राय : तीन प्रकार का मिलता है : 1. तरल, 2. क्रीम, 3. केक। तरल व क्रीम के रूप में उपलब्ध रूज फाउण्डेशन लगाने के पश्चात् व पाउडर लगाने से पूर्व लगाया जाता है। जबकि केक के रूप में उपलब्ध रूज का प्रयोग पाउडर के पश्चात् किया जाता है।

रूज का चुनाव चेहरे की त्वचा के अनुरूप करें। त्वचा का रंग गोरा होने पर हल्के रंग के रूज का प्रयोग करें तथा त्वचा का रंग साँवला होने पर गहरे रंग के रूज का उपयोग उचित रहता है। गर्मी और उमस भरे मौसम में जहाँ तक हो इसे प्रयोग न करें क्योंकि उमस पाकर कुछ देर में ही शेड गहरा हो जाता है और उस जगह धब्बा-सा प्रतीत होने लगता है।

चिकनी त्वचा के लिए केक रूज का प्रयोग करें। इसे रूई से लगायें। शुष्क और सामान्य त्वचा पर क्रीम या तरल रूज का उपयोग करें। इसे अंगुली के पोर की सहायता से लगायें। चेहरे की बनावट का रूज के प्रयोग करने के तरीके से गहरा सम्बन्ध है। इसका सन्तुलन चेहरे के दोषों को छिपा देता है। सर्वप्रथम आप अपने चेहरे का आकार देखें, तब रूज लगायें। रूज लगाने से पूर्व थोड़ा-सा हँसिये। आपके गालों का जो भाग थोड़ा ऊपर उठे, उस पर रूज लगायें। ज को गाल के त्रिकोण पर लगाकर आँख के कोने से आगे न फैलायें।

गोलाकार चेहरे पर रूज : गोल चेहरे पर रूज लगाते समय रूज को नाक की तरफ फैलायें। इससे चेहरा कुछ लम्बा प्रतीत होगा। गोलाई छिप गी। रूज को गाल की हड्डी से कुछ ऊपर लगायें। चौकोर चेहरे पर रूज : चौकोर चेहरे पर रूज को गाल पर नीचे लगाकर ऊपर और बाहर की तरफ फैलायें। चेहरे का चौकोरपन कम होकर सन्तुलित टच देगा। हाँ ठोड़ी पर थोड़ी-सा रूज लगाये ताकि चेहरा अण्डाकार दिखे। ध्यान रहे अधिक मात्रा में रूज का प्रयोग न करें इससे प्राकृतिक सुन्दरता समाप्त हो जाती है।

फेस पाउडर का सही प्रयोग

चेहरे की त्वचा को समतल, कोमल व आकर्षक बनाने में फेस पाउडर का महत्त्वपूर्ण स्थान है। पाउडर और फाउण्डेशन मेल खाता हुआ ही खरीदना चाहिए। फाउण्डेशन सूखने के पश्चात् ही फेस पाउडर लगायें। पाउडर दो रूपे में मिलता है-

1. पाउडर 2. केक के रूप में। यदि आपकी त्वचा तैलीये है तो केक रूप में पाउडर प्रयोग न लायें क्योंकि केक पाउडर तैयार करते समय उसमें तेलों का मिश्रण किया जाता है। अत : सूखा पाउडर प्रयोग लायें। चेहरे पर पाउडर हल्के हाथों से धीरे-धीरे दबा-दबाकर लगायें। पाउडर लगाते समय अपने हाथ का रुख नीचे से ऊपर की तरफ रखें। चेहरे के साथ-साथ गर्दन पर भी अवश्य पाउडर लगायें।

पाउडर लगाने के बाद देख लें कि एक सार लगा है और थोड़ी देर इस चेहरे पर सैट होने दें, फिर व्यर्थ को पाउडर झाड़ देना चाहिए। जिससे चेहरे के रोम बैठे रहें। पाउडर बुश अथवा सूती पैड से त्वचा पर ऊपर से नीचे की ओर धीरे-धीरे झाड़ें। यदि पाउडर भौहों, पलकों, बाल आदि पर क जाये तो उसे आइब्रो बुश द्वारा साफ कर दें।

अधरों की शोभा-लिपिस्टिक

लिपिस्टिक लगाने से अधरों की सुन्दरता तो बढ़ती ही है, साथ ही वह अधरों का एक प्रकार का कवच भी है-

जो अधरों को कोमल बनाये रखने में सहायक है। लिपिस्टिक लगाने से अधर शुष्क नहीं होते तथा उनकी स्निग्धता बनी रहती है। अधरों का गुलाबीपन अच्छे स्वास्थ्य व रक्त की शुद्धता का चिह्न है। प्राचीन काल में स्त्रियाँ होठों पर रंगने के लिए फूलों के रसों का उपयोग करती थीं। इसके पश्चात् पान का चलन हुआ। पान खाने से होठों को लालिमा मिल जाती थी।

होठों को रंग देने के लिए दंदासे और मिस्सी का प्रयोग भी किया जाता रहा है इससे यह पता चलता है कि प्राचीन समय से ही स्त्रियाँ सौन्दर्य के प्रति जागरूक रही हैं। जबकि उस समय साधन सीमित थे। परन्तु आज के समय में लिपिस्टिक के इतने रंग उपलब्ध हैं कि जिस रंग का चाहे उपयोग करें। लिपिस्टिक के लगभग 500 शेड बाजार में उपलब्ध हैं। लाल रंग के ही लगभग 90 शेड हैं। होठों को कान्तियुक्त बनाने तथा उन्हें सौन्दर्य का नया आयाम देने के लिए लिपिस्टक आधुनिक उपाय।

अधरों की बनावट : मनोवैज्ञानिकों का मत है कि होठों की बनावट से काफी हद तक व्यक्ति के चरित्र का आभास मिल जाता है जिसका निचला होंठ कुछ मोटा और ऊपर का धनुषाकार तथा नाक के पास सीध में कुछ उठा हुआ हो तथा होठों पर चंचलता प्रतीत हो, ऐसे अधरों वाली स्त्री सौभाग्यवती, शुभलक्षणों व स्वाभिमानी मानी जाती हैं। ऐसी स्त्री, जिसका निचला होंठ ठोड़ी की ओर कुछ झुका हुआ और उठा हो, साहसी, दयालु व सदाचारिणी मानी जाती है। स्थूल व खुरदरे होंठों वाली स्त्री चंचल व अस्थिर स्वभाव वाली होती है। यदि प्राय : उसके होंठ खुले हो तो वह स्वार्थी, क्रुर कपटी, अविश्वासी, गप्पी व चरित्रहीन मानी जाती है।

जिस स्त्री के अधर मुस्कराते समय कुछ ऊपर उठ जायें और आँखें अधमुंदी हो जाए तो समझिए वह स्त्री खुशमिजाजी व जीवन के आनन्द में बहने वाली है। जो स्त्री वार्तालाप के दौरान होठों को एक ओर टेढ़ा कर बात करे समझों वह फूहड़, मूर्ख व स्वभाव चापलूस होती है। जिसके ऊपर के होंठ का बीच का भाग छिछला हो, किन्तु दोनों होंठ पतले हों, ऐसी स्त्री चिड़चिड़ा, चालाक, स्वार्थी, निष्ठुर व द्वेष भाव रखने वाली होती है।

अधिक स्थूल होंठ विलासिता के प्रतीक माने जाते हैं। कमल सदृश मोहक अधर मृदुभाषिणी, दयालु, उदार, कल्पनाशील व निश्चल हृदया स्त्री के प्रतीक है। क्रोध की अवस्था में जहाँ होंठ नीले अथवा पीले हो जाते हैं, वहीं प्रेम और लज्जा से वे रसीले और स्वस्थ प्रतीत होते है। अधरों के माध्यम से विभिन्न भावों को व्यक्त करना सम्भव होता है। मुस्कान का जादू अपना विशेष महत्व रखता है।

अधर वही आदर्श माने जाते हैं जो न अधिक स्थूल हों न अधिक पतले तथा कोमल लालिमायुक्त हो। गुलाबी अधर स्वस्थता के प्रतीक होते हैं। ईश्वर द्वारा बनाये अधरों के आकार में परिवर्तन कर पाना असम्भव है परन्तु नियमित व्यायाम द्वारा उनमें थोड़ा सुधार किया जा सकता।

अधरों के लिए व्यायाम : होंठों की ब्युटी बढ़ाने के लिए होंठ गोल करते हुए सीटी बजाने की मुद्रा में ले जाइये। एक मिनट बाद उसी अवस्था में ले आइये। लगभग पाँच बार यह क्रिया दोहराये। उपरोक्त व्यायाम से होठों की सुन्दरता में वृद्धि के साथ-साथ जबड़ों के आकार में भी सुधार होता है।

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